मस्त विचार 1116
अब तो मज़हब कोई ऐसा चलाया जाये,
जिसमे इन्सान को इन्सान बनाया जाये.
जिसमे इन्सान को इन्सान बनाया जाये.
खुशी इस बात पर निर्भर नहीं करती कि आपके साथ क्या होता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप इस पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं.
पर जब आप दूसरों के लिए जीना सीख लेते हैं
तो वे आपके लिए जीते हैं.
मंज़िलों की फितरत है; खुद चलकर नहीं आती.
आप जीवन में कुछ भी कर सकते हैं, आप अपना दिमाग लगाते हैं, बशर्ते यह आपके दिल से संचालित हो.
वो मंजिलों के उजालों को पा नहीं सकते.
पर जो हम देते हैं उससे हम जीवन बनाते हैं.