मस्त विचार 1227
शर्मिन्दा तो यहाँ सिर्फ़ बेक़सूर होते हैं…
शर्मिन्दा तो यहाँ सिर्फ़ बेक़सूर होते हैं…
आसान होने से पहले सब कुछ मुश्किल है.
हँसे और हँसाये, मस्ती में रहे और मस्ती को बाँटें – ” उन्हें जीना आ गया.”
तुम जिस जन्नत की तलाश कर रहे थे, वह तुम्हारे बाहर नहीं है.
और अगर जीना है तो आगे देखो.
तो परिवर्तन की यह आदत है कि वह बिना बुलाए ही
आ जाता है और सारा मामला गड़बड़ा देता है.
संगत आपकी खराब होगी और बदनाम माँ बाप और संस्कार होंगे.
नकली लोगों के नाटक में क्यों फंसें _ जब आप अपने जीवन को उन लोगों के साथ साझा कर सकते हैं _ जो वास्तव में आपकी परवाह करते हैं.