मस्त विचार 957
जीवन की रीत पुरानी है चट्टानों से टकराने की हमने जीवन में ठानी है.
जीवन की रीत पुरानी है चट्टानों से टकराने की हमने जीवन में ठानी है.
हँसना भी चाहूँ तो रूला देती है….आप की कमी..
हसने लगी ज़िन्दगी, मन मुस्कुराया हैं दिव्यदृष्टि देकर के, अँधेरा मिटाया हैं नज़रे नूरानी से, स्वरुप दिखाया हैं गिर गए थे हम तो, तू ने उठाया हैं अवगुण नहीं देखे, गले से लगाया हैं अनमोल खज़ाना देकर, बादशाह बनाया हैं विषयों के कीचड़ में, गिरने से बचाया हैं मुरझाया मन का चमन, तू ने खिलाया हैं भूल गए थे हसना, तू ने हसाया हैं संसार सागर से, तू ने तराया हैं मन पर जन्मो से, गफलत का पर्दा था दुई का पर्दा हटा कर, नींद से जगाया हैं कैसे भूलूँ रहमत, तन मन चमकाया हैं तू ने इतना बचाया है.
तीन पहर तो बीत गये,
बस एक पहर ही बाकी है।
जीवन हाथों से फिसल गया,
बस खाली मुट्ठी बाकी है।
सब कुछ पाया इस जीवन में,
फिर भी इच्छाएं बाकी हैं।
दुनिया से हमने क्या पाया,
यह लेखा जोखा बहुत हुआ,
इस जग ने हमसे क्या पाया,
बस यह गणनाएं बाकी हैं।
तीन पहर तो बीत गये,
बस एक पहर ही बाकी है।
जीवन हाथों से फिसल गया,
बस खाली मुट्ठी बाकी है।
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इस भाग दौड़ की दुनिया में,
हमको एक पल का होश नहीं,
वैसे तो जीवन सुखमय है,
पर फिर भी क्यों संतोष नहीं,
क्या यूँ ही जीवन बीतेगा ?
क्या यूँ ही सांसे बंद होंगी ?
औरों की पीड़ा देख समझ,
कब अपनी आँखे नम होंगी ?
मन के भीतर कहीं छिपे हुए,
इस प्रश्न का उत्तर बाकी है।
तीन पहर तो बीत गये,
बस एक पहर ही बाकी है।
जीवन हाथों से फिसल गया,
बस खाली मुट्ठी बाकी है।
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मेरी खुशियां, मेरे सपने,
मेरे बच्चे, मेरे अपने,
यह करते करते शाम हुई,
इससे पहले तम छा जाए,
इससे पहले कि शाम ढ़ले,
दूर परायी बस्ती में,
एक दीप जलाना बाकी है।
तीन पहर तो बीत गये,
बस एक पहर ही बाकी है।
जीवन हाथों से फिसल गया,
बस खाली मुट्ठी बाकी है।
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जिन बातों को ख़ुद नहीं समझे औरों को समझाया हैं…..
लोग भी…रिश्ते भी…और कभी कभी हम खुद भी.
खबर ही ना थी कि तुम मेरी रूह में समाये हुए हो.
_ अपने जीवन को खूबसूरत और खुशगवार बनाना हमारे ही हाथ में है.
_बस अपनी परिस्थितियों को देखने के नजरिए में थोड़ा सा परिवर्तन कीजिए और पाइए ढेर सारा फर्क अपने जीवन में.
_अक्सर कुछ अनसोचा, अनचाहा होने पर हम भावनात्मक रूप से थक जाते हैं और उदास हो जाते हैं.
_ यह जरुरी है कि कुछ समय ऐसे पलों को भी भरपूर जीएं.
_ याद रखें, यह मानसिक टूटन या थकान अस्थायी होती है,
_ कुछ प्रयासों द्वारा इसे दूर कर इस स्थिति से उबरा जा सकता है.