मस्त विचार 4487
समझे बिना किसी को पसंद ना करो और समझे बिना किसी को खो भी मत देना,
क्योंकि फिक्र दिल में होती है शब्दों में नहीं और गुस्सा शब्दों में होता है दिल में नहीं..
क्योंकि फिक्र दिल में होती है शब्दों में नहीं और गुस्सा शब्दों में होता है दिल में नहीं..
तब हमारे लिए भी कुछ अच्छा हो रहा होता है.
अच्छा होना भी बुरी बात है इस दुनिया में..
लेकिन हमारे कर्मों के सिर्फ़ हम ही उत्तराधिकारी हैं.
जियो उसके लिए जो तुम्हारी दुनिया खूबसूरत बनाये !!!
या कहीं और सिलसिले मजबूत हो गए हैं..।।
पर एक शख्स है नासमझ मुझे बेहतरीन कहता है.
उसी को इस संसार में रहने का ढंग आ गया …