सुविचार 1044

किताबी इल्म डिगरियां देता है जबकि दुनियाबी इल्म इंसानी सोच की महीन सी झीनीझीनी चादर बुनना भी सिखा सकता है.

सुविचार – U N C L E – 1043

U N C L E 😜😂

उम्र पचास पार है लेकिन
शक्ल हमारी तीस के जैसी
मुझको uncle कहने वाले,
धत्त तुम्हारी ऐसी तैसी
बेटे के कॉलेज गया तो,
टीचर देख मुझे मुस्कुराई
बोली क्या मेनटेइंड हो मिस्टर,
पापा हो, पर लगते हो भाई
क्या बतलाऊँ उसने फिर,
बातें की मुझ से कैसी कैसी
मुझको uncle कहने वालों,
धत्त तुम्हारी ऐसी तैसी
पडोसन बोली, सेकंड हैंड हो,
लेकिन फ़्रेश के भाव बिकोगे
बस थोड़ी सी दाढ़ी बढ़ा लो,
बिलकुल हीरो जैसे दिखोगे
मुझको uncle कहने वालों,
धत्त तुम्हारी ऐसी तैसी
बीवी सोच रही है शौहर,
मेरा कितना अच्छा है जी
पढ़ती नहीं गुलज़ार साहेब को,
दिल तो आख़िर बच्चा है जी
नीयत मेरी साफ़ है यारों
नही हरकतें ऐसी वैसी
मुझको uncle कहने वालों,
धत्त तुम्हारी ऐसी तैसी
कितने जंग लड़े और जीते
इन गुज़रे सालों में हैं
दो-एक झुर्रियाँ गालों में हैं,
और सफ़ेदी बालों में है
इरादे मगर मज़बूत हैं अब भी,
उमंग भी सॉलिड पहले जैसी
मुझको uncle कहने वालों,
धत्त तुम्हारी ऐसी तैसी
जीने का जज़्बा क़ायम हो तो,
उम्र की गिनती फिर फ़िज़ूल है
अपने शौक़ को ज़िंदा रखो,
जीने का बस यही उसूल है
ज़िंदादिली का नाम है जीवन,
परिस्थितियाँ हों चाहे जैसी
मुझको uncle कहने वालों,
धत्त तुम्हारी ऐसी तैसी
🍀🍃🍀🍃🍀🍃🍀🍃🍀
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सुविचार – ज़िंदगी को बहुत सीरियसली लिया मैंने… – 1042

ज़िंदगी को बहुत सीरियसली लिया मैंने…

हर बात के अर्थ निकाले …

हर ख़ामोशी समझी …

हर आँख को पढ़ा मैंने …

अंत में जाना ..

जीवन सहज होने में है, यूँ ही जीने में है …

जंग नहीं खेल है ..

कोई फर्क नहीं पड़ता हार जाने से …

न फर्क पड़ता गिर पड़ने से …

उठो कपड़े झाड़ो चल पड़ो …

न बोझ बनो किसी पर ..

न किसी को बोझ बनाओ ..

जितना मिले नाचो गाओ ..

कभी मन करे तो चुप हो जाओ ..

पर अब हर बात में अर्थ न ढूंढो ..

मस्त विचार 942

जो कल था उसे भूल कर तो देख

जो आज है उसे जी कर तो देख,

आने वाला पल खुद ही सँवर जाएगा

एक बार मेरे यार को याद कर के तो देख. 

मस्त विचार 941

शिकायतें तो बहुत थी जमाने से,

जो जवाब मांगने निकला तो,

खुद को सवालों से घिरे पाया,

सोचा, लोगों को उनकी असलियत

बता दूँ,

जब देखा सामने तो,

खुद को आइने के सामने पाया.

परेशानी का सबब बनना है आसान,

रास्ता निकालना जरा है मुश्किल.

सबके साथ चल, सबकी बात कर,

साथी हैं सब सफर के.

तंग है तो क्या मलाल है.

आज है गम तो, कल खुशहाल है.

सुख-दुख तो मौसम हैं जीवन के,

बदल जायेगा मौसम,

रात ऋतु के बदलते.

रोता हुआ आया था,

रुलाते हुए जाना है.

सबकी ख़ुशी में शरीक हो ले,

कट जाएगा रास्ता,

फिर हँसते-हँसते.

जो हासिल है, वो भी कम तो नहीं.

बन जा सहारा किसी डूबते का,

चाहे खुद को तिनका समझ कर. Pk

Quotes by प्लूटार्क

केवल थोड़े से कुकर्म, बहुत से गुणों को दूषित करने में समर्थ होते हैं.
त्रुटि निकालना सरल है, अच्छा कार्य करना कठिन है.

Quotes by गुलज़ार

ख़्वाहिशें कुछ कुछ यूँ भी अधूरी रही,

पहले उम्र नहीं थी अब उम्र नहीं रही.

जख्म कहाँ कहाँ से मिले हैं…..छोड़ इन बातों को..

जिन्दगी तू तो बता सफर और कितना बाकी है…

मुख़्तसर सा गुरुर भी ज़रूरी है जीने के लिए

ज़्यादा झुक के मिलो तो दुनिया पीठ को पायदान बना लेती है

कुछ रिश्तों में मुनाफा नहीं होता

पर जिन्दगी को अमीर बना देते हैं

जब गिला शिकवा अपनो से हो तो खामोशी ही भली

अब हर बात पे जंग हो यह जरूरी तो नहीं

दर्द की अपनी भी एक अदा है..

वो भी सहने वालों पर फ़िदा है..

मिलता तो बहुत कुछ है इस ज़िंदगी में..

बस हम गिनती उसी की करते हैं जो हासिल ना हो सका

अब न मांगेंगे ज़िन्दगी या रब

ये गुनाह हमने इक बार किया

इच्छाएँ बड़ी बेवफा होती हैं..

कमबख्त, पूरी होते ही बदल जाती हैं..

थोड़ा सुकून भी ढूँढिये जनाब,

ये जरूरतें तो कभी खत्म नहीं होंगी

मैने सिर्फ तुम्हारे कदम गिने थे, तुम्हारे क़दमों की आहट सुनी थी

तुमने आना छोड़ दिया लेकिन मैंने इंतजार करना नहीं छोड़ा

कौन कहता है कि हम झूठ नहीं बोलते

एक बार खैरियत तो पूछ के देखिए

सहम सी गई है ख्वाहिशें,,,

शायद जरूरतों ने ऊंची आवाज में बात की होगी

यू तो ज़िन्दगी तेरे सफर से शिकायते बहुत थी

मगर दर्द जब दर्ज कराने पहुँचे तो कतारे बहुत थी

सुना है.. काफी पढ़ लिख गए हो तुम..

कभी वो भी पढ़ो जो हम कह नहीं पाते..

सो जाइये सब तकलीफों को सिरहाने रख कर ,,,क्योंकि

सुबह उठते ही इन्हें फिर से गले लगाना है.

थोड़ी थोड़ी गुफ़्तगू दोस्तों से करते रहिये

जाले लग जाते हैं अक्सर बंद मकानों में..

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