| Oct 29, 2015 | मस्त विचार
बिकने वाले और भी हैं……जाओ जा कर खरीद लो.
हम कीमत से नहीं……किस्मत से मिला करते हैं.
| Oct 28, 2015 | मस्त विचार
इन्सान तो हर घर में पैदा होते हैं….!!
बस इंसानियत कहीं-कहीं जन्म लेती है….!!
| Oct 28, 2015 | मस्त विचार
रिवाज़ तो यही है दुनिया का मिल जाना बिछड़ जाना…
तुम से ये कैसा रिश्ता है………ना मिलते हो ना बिछड़ते हो…
| Oct 27, 2015 | मस्त विचार
अरसों बाद खुल के हंसी आयी _ वो भी खुद पे..
| Oct 27, 2015 | मस्त विचार
तेरे दीवाने में भी क्या आ गयी तेरी अदा.
क्यों ठहर जाता है हर आता हुआ, जाता हुआ.
| Oct 27, 2015 | मस्त विचार
अजीब सी बस्ती में ठिकाना है मेरा… जहाँ लोग मिलते कम, झांकते ज़्यादा है.!!
लोग अपनी ज़िंदगी से ज़्यादा दूसरों की ज़िंदगी में झांकते हैं..
_ शायद इसलिए उनकी खुद की ज़िंदगी उलझी रहती है.!!
| Oct 27, 2015 | मस्त विचार
वजह पूछने का तो मौका ही नही मिला, _
_ बस वो लहजे बदलते गये और हम अजनबी होते गये.
“– ज़रा अपने लहजे संभाल, बातें नस्लों का पता देती हैं..–“