सुविचार 937

शिछा अच्छे दिनों में आभूषण, कष्ट के दिनों में सहायक और वृद्धावस्था में संचित भंडार है.

मस्त विचार 823

मैंने महसूस किया है जीवन में,

जब भी उदास हुआ जीवन में,

तू ही साथ रहा मेरे जीवन में,

जब खराब होता था मन बेहद,

चुपचाप बैठे रहना चाहता था अँधेरे में,

तू ने ही निकाला है अँधेरे से जीवन में.

मैंने महसूस किया है जीवन में.

सुविचार 935

जब आप मूड, भावनावो और दोषारोपण के बीच अटकते हो, अगर आपके पास ज्ञान है तो इन सब बातों से कोई फर्क नहीं पड़ेगा और अगर पड़ेगा भी तो वह कुछ पलों से ज्यादा टिकने वाला नहीं.

सुविचार 933

पीड़ा और प्रसन्नत्ता, प्रकाश और अंधकार की भांति एकदूसरे के पीछे चलते हैं.
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