मस्त विचार 830
कब तक यूँ परायों में अपने होने के निशां ढूंढता फिरूँ……..
कब तक यूँ परायों में अपने होने के निशां ढूंढता फिरूँ……..
वरना पत्तों की तरह तुझको हवा ले जायेगी…..
यदि कोई व्यक्ति जीवन में महान कार्य नहीं कर सकता है जिसे जनता द्वारा सराहा जा सकता है, तो वह छोटे कामों को अधिक प्रेम और दक्षता के साथ कर सकता है.
कुछ ख़ार कम कर गए गुज़रे जिधर से हम……
दिल दुखा कर जो मिले वो फायदा अच्छा नही…….
उस आदमी को कोई नहीं हरा सकता _ जो अकेले, आत्मविश्वास के साथ, बाधाओं, गरीबी, दुर्भाग्य और कठिनाइयों के खिलाफ संघर्ष करने के लिए तैयार है.
जिसके सामने आईना रखा,हर शख्स वो मुझ से रूठ गया.