मस्त विचार 933
मैं खुद को ऎसी बातों से, जरा अंजान रखता हूँ.
मैं खुद को ऎसी बातों से, जरा अंजान रखता हूँ.
हर काम पहले तो हमारे लिए नया लगता है,
किंतु जब करने बैठेंगे तो अपनेआप ही आ जाएगा.
जलते हुए में घी डाल सकते हो, तो डालो. और यह भी नहीं कर सकते तो, मत करो. लेकिन जलते हुए दीये को बुझाओ मत.
घनघोर अंधेरा छाये जब
कोई राह नज़र ना आये जब
कोई तुमको फिर बहकाये जब
इस बात पे थोड़ी देर तलक
तुम आँखें अपनी बंद करना
और अंतरमन की सुन लेना
मुमकिन है हम-तुम झूठ कहें
पर अंतरमन सच बोलेगा……….
जब लम्हा-लम्हा ‘आरी’ हो
और ग़म खुशियों पे भारी हो
दिल मुश्किल में जब पड़ जाये
कोई तीर सोच की ‘अड़’ जाये
तुम आँखें अपनी बंद करना
और अंतरमन की सुन लेना
मुमकिन है हम-तुम झूठ कहें
पर अंतरमन सच बोलेगा……..
जब सच-झूठ में फर्क ना हो
जब गलत-सही में घिर जाओ
तुम नज़र में अपनी गिर जाओ
इस बात पे थोड़ी देर तलक
तुम आँखें अपनी बंद करना
और अंतरमन की सुन लेना
मुमकिन है हम-तुम झूठ कहें
पर अंतरमन सच बोलेगा……..
ये जीवन एक छाया है
दुख, दर्द, मुसीबत माया है
दुनिया की भीड़ में खोने लगो
तुम खुद से दूर होने लगो
तुम आँखें अपनी बंद करना
और अंतरमन की सुन लेना
मुमकिन है हम तुम झूठ कहें
पर अंतरमन सच बोलेगा ……।
आज बे वजह क्यूँ भूल गये कल तक बेवजह चाहने वाले.
सामान्य मानसिकता वाले लोग, घटनाओं पर चर्चा करते हैं.
संकुचित मानसिकता वाले, लोगों के बारे में चर्चा करते हैं.
किसी को पाने की यूँ इन्तहा कर दी मैंने……
मुझे मिलती है ताकत और मुस्कुराने की. वो समझतें हैं बिखर जाऊँगा. मुझे यकीन है और निखर जाँऊगा. मैंने गिर- गिर के अपने आप को उठाया है. मुझे यकीन है रब का मुझ पर साया है.