मस्त विचार 734
मैं अपना दर्द अब कम बांटता हूँ.
मैं अपना दर्द अब कम बांटता हूँ.
एक “कामयाबी” ही है, जो ठोकर खाकर ही मिलती है.
“बेरंग है पानी फिर भी…जिन्दगी कहलाता है, ढेर सारे रंग हैं शराब के…,फिर भी गन्दगी कहलाता है. लोग भी कमाल करते हैं…जिन्दगी के गम भुलाने के लिये, गन्दगी में…जिन्दगी मिलाकर पीते हैं.
कामयाबी तुम्हारे पीछे झक मार कर आएगी.
लोग खुशियाँ डालते कम, उठाते ज्यादा है…
क्या बताएं इस दिलका आलम, नसीब मैं लिखा है इंतज़ार करना..
ये मुझे भी पता है कि तुझे क्या पता है. तेरे पते को और मेरे पते को, ये भी पता है कि क्या क्या पता है.