| Oct 28, 2015 | मस्त विचार
इन्सान तो हर घर में पैदा होते हैं….!!
बस इंसानियत कहीं-कहीं जन्म लेती है….!!
| Oct 28, 2015 | मस्त विचार
रिवाज़ तो यही है दुनिया का मिल जाना बिछड़ जाना…
तुम से ये कैसा रिश्ता है………ना मिलते हो ना बिछड़ते हो…
| Oct 27, 2015 | मस्त विचार
अरसों बाद खुल के हंसी आयी _ वो भी खुद पे..
| Oct 27, 2015 | मस्त विचार
तेरे दीवाने में भी क्या आ गयी तेरी अदा.
क्यों ठहर जाता है हर आता हुआ, जाता हुआ.
| Oct 27, 2015 | मस्त विचार
अजीब सी बस्ती में ठिकाना है मेरा… जहाँ लोग मिलते कम, झांकते ज़्यादा है.!!
लोग अपनी ज़िंदगी से ज़्यादा दूसरों की ज़िंदगी में झांकते हैं..
_ शायद इसलिए उनकी खुद की ज़िंदगी उलझी रहती है.!!
| Oct 27, 2015 | मस्त विचार
वजह पूछने का तो मौका ही नही मिला, _
_ बस वो लहजे बदलते गये और हम अजनबी होते गये.
“– ज़रा अपने लहजे संभाल, बातें नस्लों का पता देती हैं..–“
| Oct 26, 2015 | मस्त विचार
किसी को नसीहत देने के लिए जितनी अक्ल चाहिए,
नसीहत से फायदा उठाने के लिए उस से कहीं ज्यादा अक्ल चाहिए.
| Oct 25, 2015 | मस्त विचार
हर किसी को खुश रख सकूँ,वो तरीका मुझे नहीं आता.
जो मैं नहीं हूँ वैसा दिखने का, सलीका मुझे नहीं आता.
दिल में कुछ और जुबां पे कुछ
ये बाजीगरी का कमाल मुझे नहीं आता.
| Oct 25, 2015 | मस्त विचार
हर हकीकत शुरू में एक सपना होती है,
और जब करने वाले लग जाते है तो वो हकीकत हो जाती है.