मस्त विचार 852

रिवाज़ तो यही है दुनिया का मिल जाना बिछड़ जाना…

तुम से ये कैसा रिश्ता है………ना मिलते हो ना बिछड़ते हो…

मस्त विचार 849

अजीब सी बस्ती में ठिकाना है मेरा… जहाँ लोग मिलते कम, झांकते ज़्यादा है.!!

लोग अपनी ज़िंदगी से ज़्यादा दूसरों की ज़िंदगी में झांकते हैं..

_ शायद इसलिए उनकी खुद की ज़िंदगी उलझी रहती है.!!

मस्त विचार 848

वजह पूछने का तो मौका ही नही मिला, _

_ बस वो लहजे बदलते गये और हम अजनबी होते गये.

“– ज़रा अपने लहजे संभाल, बातें नस्लों का पता देती हैं..–“

सुविचार 967

अधिकतर लोग झूठी दुनिया में जीतें हैं,,,,,,,,,

सच को भी समझना चाहिए ………..

मस्त विचार 847

किसी को नसीहत देने के लिए जितनी अक्ल चाहिए,

नसीहत से फायदा उठाने के लिए उस से कहीं ज्यादा अक्ल चाहिए.

मस्त विचार 846

हर किसी को खुश रख सकूँ,वो तरीका मुझे नहीं आता.

जो मैं नहीं हूँ वैसा दिखने का, सलीका मुझे नहीं आता.

दिल में कुछ और जुबां पे कुछ

ये बाजीगरी का कमाल मुझे नहीं आता.

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