सुविचार 809

भीतर क्षमा हो, तो क्षमा निकलेगी. भीतर क्रोध हो, तो क्रोध निकलेगा. इस बात को एक मौलिक सूत्र की तरह अपने हृदय में लिखकर रख छोड़ें कि जो आपके भीतर है, वही निकलेगा. परिस्थितियां चाहे कुछ भी हों. इसलिए जब भी कुछ आपके बाहर निकले, तो दूसरे को दोषी मत ठहराना. वह आपकी ही संपदा है, जिसको आप अपने भीतर छिपाए थे.

मस्त विचार 735

कसूर है हमारी आंखों का

जो तुमको देख ही नहीं पातीं…..

मैंने तो सुना है मेरे यार

तुम उनको भी नजर आते हो

जिनकी आंखे नहीं होतीं….

सुविचार 807

कागज़ की नाव पानी में बहुत देर तक नहीं चल सकती. इसी तरह धोखा देने वाला व्यक्ति चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, एक न एक दिन उसकी पोल खुल ही जाती है.

मस्त विचार 733

दुनिया की हर चीज ठोकर लगने से टूट जाती है,

एक “कामयाबी” ही है, जो ठोकर खाकर ही मिलती है.

मस्त विचार 732

लाख टके की बात

“बेरंग है पानी फिर भी…जिन्दगी कहलाता है,

ढेर सारे रंग हैं शराब के…,फिर भी गन्दगी कहलाता है.

लोग भी कमाल करते हैं…जिन्दगी के गम भुलाने के लिये,

गन्दगी में…जिन्दगी मिलाकर पीते हैं.

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