मस्त विचार 691
_ लेकिन काम से मिली पहचान जिन्दगी भर रहती है.
मस्त विचार 690
रात हो या उम्र, एक ना एक दिन कट ही जाएगी.
मस्त विचार 689
सच है दुनिया वालो की हम हैँ अनाड़ी…
सुविचार 785
_ वह अपने भीतर के श्रेस्ठतर को बाहर निकालना चाहता है या निम्नतर की व्याख्या में ही सीमित रहना चाहता है.
_ हमें तो उन्हें चुनना है जो कम बुरा है.!!
मस्त विचार 688
आप का स्वभाव ही आपका भविष्य है.
मस्त विचार 687
मस्त विचार 686
खूब लिखी है ग़लतियों से जुदा तू भी नही, मैं भी नही, दोनो इंसान हैं, खुदा तू भी नही, मैं भी नही .. ” तू मुझे ओर मैं तुझे इल्ज़ाम देते हैं मगर, अपने अंदर झाँकता तू भी नही, मैं भी नही ” .. ” ग़लत फ़हमियों ने कर दी दोनो मैं पैदा दूरियाँ, वरना फितरत का बुरा तू भी नही, मैं भी नही.
और जो अपना सब छोड़ कर आए, _ उसे तवज्जों नही देता !
सारा दोष बस ऐसी फितरत का ही है !
मस्त विचार 685
जो परिंदा अपने लिये आसमान ढूँढ़ता है !!





