मस्त विचार 691

पहचान से मिला काम कम समय के लिए ही चलता है, _

_ लेकिन काम से मिली पहचान जिन्दगी भर रहती है.

सुविचार 785

इन्सान में अगर बुराईयाँ है, तो अच्छाईयां भी है. सवाल यह है कि किसका चुनाव क्या है ?

_ वह अपने भीतर के श्रेस्ठतर को बाहर निकालना चाहता है या निम्नतर की व्याख्या में ही सीमित रहना चाहता है.

अच्छे और बुरे का चुनाव करने का अधिकार हमें कहां प्राप्त है ??

_ हमें तो उन्हें चुनना है जो कम बुरा है.!!

मस्त विचार 687

कोई भी निर्णय लेने से पहले दिल और दिमाग दोनों का सन्तुलन बिठाएँ, दिल जहाँ आपको यह बताएगा कि आपको क्या करने में ख़ुशी मिलेगी, तो वहीँ दिमाग बताएगा कि क्या अच्छा है और क्या नहीं.

मस्त विचार 686

ये चन्द पंक्तियाँ जिसने भी लिखी है,

खूब लिखी है

ग़लतियों से जुदा तू भी नही,

मैं भी नही,

दोनो इंसान हैं, खुदा तू भी नही,

मैं भी नही ..

” तू मुझे ओर मैं तुझे इल्ज़ाम देते हैं मगर,

अपने अंदर झाँकता तू भी नही,

मैं भी नही ” ..

” ग़लत फ़हमियों ने कर दी दोनो मैं पैदा दूरियाँ,

वरना फितरत का बुरा तू भी नही, मैं भी नही.

इंसान की फितरत है _ जो छोड़ कर जाए _ उसके लिए तड़पता है ;

और जो अपना सब छोड़ कर आए, _ उसे तवज्जों नही देता !

सारा दोष बस ऐसी फितरत का ही है !

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