मस्त विचार 698
और दूसरों पर रखो तो कमजोरी बन जाती है…
और दूसरों पर रखो तो कमजोरी बन जाती है…
कुछ लोग बेगाने लुट गए.. कुछ अपनो ने बदनाम किया, कुछ बन अफसाने छूट गए .. कुछ अपनी शिकस्ता नाव थी, कुछ हम से किनारे छुट गए ..!
तसल्ली हैं कि अभी तक शक्ल की पहचान बाकी हैं…!
चलने मे माहीर बन जाऊँगा. …..या तो मंजिल मिल जायेगी ….या मूसाफिर बन जाऊँगा.
पर बहुत कुछ दिखा जाता है………..
वरना जीत की क्या औकात,जो हमें ठुकरा दे….
नफरत, शक, नाराज़गी, ज़रुरत..ने हमेशा तोड़ा हैं,
कभी जोड़ा नहीं किसी को…