सुविचार 795
ज़रूरी ये हो जाता है हर हार में हम कुछ सीख जाएँ ….
ज़रूरी ये हो जाता है हर हार में हम कुछ सीख जाएँ ….
क्योंकि अच्छा इन्सान अच्छा समय ला सकता है, लेकिन अच्छा समय अच्छा इन्सान नहीं ला सकता.
तू रोज़ ढूँढ़ता है खुद को मेरे अल्फाज़ों मे..
लोग भी…रिश्ते भी…और कभी कभी हम खुद भी…
वरना ख़ुशी खुद हमसे मुस्कुराना सिखने आया करती थी..
पहले मेरे लफ़्ज़ों में था .. अब मेरी खामोशियों में है…!!
कि एक मुद्दत से ढूंढ़ रहा हूँ कसूर अपना…!!
माफ़ कर देने का आनन्द, ज़िन्दगी भर रहेगा.
लेकिन……बेइज्जती हमेशा नाप तोल कर करना, क्यों कि ये वो उधार है जो हर कोई ब्याज सहित चुकाने के लिए मरा जाता है.