मस्त विचार 563
थोड़ी सी तो मेहरबान हो जा मुझ पर ऐ ख़ुशी,
थक गया हूँ हंसी की आड़ में गम छुपाते छुपाते.
थक गया हूँ हंसी की आड़ में गम छुपाते छुपाते.
फर्क इस बात से पड़ता है, कितने पल हमने ख़ुशी से बिताये, कितने लोग हमारी वजह से खुशी से जीए …!!
लोग भी रास्ते भी…..अहसास भी और कभी कभी हम खुद भी…..
रात हो या उम्र इक दिन कट ही जायेगी.
नेकी तेरी कहीं तुला पर तुले ना तुले,
मांग ले अपनी गलतियो की माफी खुद से,
क्या पता आँख कल ये खुले ना खुले ?