मस्त विचार 697
कुछ लोग बेगाने लुट गए.. कुछ अपनो ने बदनाम किया, कुछ बन अफसाने छूट गए .. कुछ अपनी शिकस्ता नाव थी, कुछ हम से किनारे छुट गए ..!
कुछ लोग बेगाने लुट गए.. कुछ अपनो ने बदनाम किया, कुछ बन अफसाने छूट गए .. कुछ अपनी शिकस्ता नाव थी, कुछ हम से किनारे छुट गए ..!
तसल्ली हैं कि अभी तक शक्ल की पहचान बाकी हैं…!
चलने मे माहीर बन जाऊँगा. …..या तो मंजिल मिल जायेगी ….या मूसाफिर बन जाऊँगा.
पर बहुत कुछ दिखा जाता है………..
वरना जीत की क्या औकात,जो हमें ठुकरा दे….
नफरत, शक, नाराज़गी, ज़रुरत..ने हमेशा तोड़ा हैं,
कभी जोड़ा नहीं किसी को…