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एक बात गांठ बांध लीजिए।
आपकी जिंदगी खराब करने के लिए किसी दुश्मन का होना जरूरी नहीं है।
कई बार आपके आसपास ऐसे लोग मौजूद होते हैं, जिन्हें आप अपना समझते हैं और वही धीरे धीरे आपकी सोच, आपका आत्मविश्वास और आपकी जिंदगी का सुकून खा जाते हैं।
संजय सिन्हा की आज की कहानी इन्हीं लोगों के बारे में है।
एक आदमी था। उसने तय किया कि अब वह अपनी जिंदगी में कुछ बड़ा करेगा।
उसने अपने दस परिचितों से अपनी योजना साझा की।
पहले ने कहा, रहने दो, तुमसे नहीं होगा।
दूसरे ने कहा, दुनिया बहुत खराब है।
तीसरे ने कहा, इतनी मेहनत करने से क्या मिलेगा?
चौथे ने कहा, तुम्हारी किस्मत ही खराब है।
पांचवें ने उसकी पीठ थपथपाई और फिर पीठ पीछे उसकी कहानी बदल दी।
छठे ने उसकी मदद मांगी, लेकिन जब उसकी मदद करने की बारी आई तो फोन उठाना बंद कर दिया।
सातवें ने उसकी तरक्की की खबर सुनी तो मुस्कुराया जरूर, मगर उसकी आंखों में खुशी नहीं थी।
आठवां अपनी बुरी आदतों में ऐसा डूबा था कि उसे अपनी जिंदगी की फिक्र नहीं थी, लेकिन वह दूसरों को जिंदगी जीने का तरीका सिखाता था।
नौवें के पास खुद करने के लिए कुछ नहीं था, मगर वह हर वक्त उसकी योजनाओं में कमियां निकालता रहता था।
दसवां सबसे खतरनाक था। वह हर बार कहता, मैं तो तुम्हारा भला चाहता हूं। फिर ऐसी सलाह देता कि आदमी अपना फैसला लेने से पहले ही डर जाए।
उस आदमी को लगा कि दुनिया में कोई उसका अपना नहीं है।
लेकिन एक दिन उसे एक बात समझ आई।
उसे दस दुश्मनों ने नहीं रोका था। उसे उन दस लोगों की बातों पर भरोसा करने की आदत ने रोका था।
उस दिन उसने किसी से लड़ाई नहीं की। किसी को बुरा भला नहीं कहा। उसने बस अपनी जिंदगी के दरवाजे पर एक अदृश्य ताला लगा दिया।
अब हर कोई उससे मिल सकता था, लेकिन हर कोई उसके मन में जगह नहीं बना सकता था।
प्रिय परिजनों, जिंदगी में दस तरह के लोगों से हमेशा सावधान रहिए।
शिकायत करने वाले, क्योंकि वे आपको आपकी खुशियां भूलना सिखा देंगे।
हर बात में बुराई खोजने वाले, क्योंकि वे आपकी उम्मीदों को कमजोर कर देंगे।
आलसी लोग, क्योंकि वे आपको मेहनत के बजाय बहाने देना सिखाएंगे।
हर बात में खुद को पीड़ित बताने वाले, क्योंकि वे आपको अपनी जिम्मेदारी से भागना सिखाएंगे।
झूठ बोलने वाले, क्योंकि उनके साथ रहते रहते आपको सच पर भी शक होने लगेगा।
मतलब के रिश्ते रखने वाले, क्योंकि वे आपको इंसान नहीं, इस्तेमाल की चीज समझेंगे।
आपसे जलने वाले, क्योंकि आपकी छोटी सी हार उनके लिए त्योहार और आपकी बड़ी जीत उनके लिए मातम बन जाएगी।
अपनी बुरी आदतों के गुलाम लोग, क्योंकि कई बार उनकी गलतियों की कीमत भी आपको चुकानी पड़ती है।
बिना लक्ष्य वाले लोग, क्योंकि वे आपकी मंजिल को भी बेकार साबित करने में लगे रहेंगे।
और आखिर में वे लोग, जो आपको आगे बढ़ने से रोकते हैं। ये सबसे ज्यादा खतरनाक हैं, क्योंकि ये आपको रोकते वक्त भी यही कहते हैं कि हम तुम्हारा भला चाहते हैं।
लेकिन संजय सिन्हा की एक बात और समझिए।
इन लोगों से बचने का मतलब यह नहीं कि आप खुद को बहुत अच्छा और बाकी दुनिया को खराब मानने लगें।
हो सकता है, कभी-कभी इनमें से कोई आदत हमारे भीतर भी हो।
इसलिए दूसरों को पहचानने से पहले खुद को पहचानिए।
किसी को अपनी जिंदगी से निकालना हमेशा जरूरी नहीं होता। कई बार बस उसे अपनी जिंदगी का फैसला करने का अधिकार देना बंद करना पड़ता है।
और हां, हर किसी को जवाब देना भी जरूरी नहीं है।
कुछ लोगों को आपकी सफाई चाहिए होती है, ताकि वे आपसे बहस कर सकें।
कुछ को आपकी कमजोरी चाहिए होती है, ताकि वे आपको नीचा दिखा सकें।
और कुछ को आपकी असफलता चाहिए होती है, ताकि वे कह सकें कि हमने तो पहले ही कहा था।
ऐसे लोगों को जवाब देने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप अपनी जिंदगी में इतना अच्छा कर जाएं कि आपको जवाब देने की जरूरत ही न पड़े।
याद रखिए, आपके जीवन में कौन आता है, यह हमेशा आपके हाथ में नहीं होता। लेकिन किसे अपने मन में कितनी जगह देनी है, यह फैसला आपका होना चाहिए।
#SanjaySinha




