सुविचार – माफ़ – माफ – माफ़ी – माफ़ी – 177

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लोगों को माफ़ करना तो एक बार को संभव है, लेकिन उन्हें अपनी ज़िंदगी में वही पहले वाला स्थान दे पाना.. लगभग नामुमकिन.!!
किसी की जिंदगी बर्बाद करके माफ़ी तो मांग सकते हो,

_ मगर बर्बाद की हुई जिंदगी को दोबारा संवार नहीं सकते..

आप कुछ लोगों को अपनी ज़िंदगी में दोबारा आने का मौक़ा दिए बग़ैर भी माफ़ कर सकते हो.
माफ़ी से कुछ नहीं होता, कुछ बातें दिल को लग जाती हैं, जो कभी भुलाई नहीं जाती..
माफ़ी सिर्फ उन्हें मिलनी चाहिए, जो जाने अनजाने में भूल कर बैठते है.. ना की उन्हें.. जो सोच समझकर चालाकी करते हैं.
हर बार इंसानियत के नाम पर माफ कर देना सही नहीं होता..

_ कुछ हालात ऐसे होते हैं, जहाँ हमारी चुप्पी और नरमी को लोग हमारी कमजोरी समझ लेते हैं, ऐसे में खुद की हिफाज़त के लिए थोड़ा सख्त होना भी जरूरी हो जाता है..
_ ताकि सामने वाला समझ सके कि हर बार सहना हमारी मजबूरी नहीं, हमारी मर्यादा है.!!
हम नहीं जानते कि कौन सा व्यक्ति इस समय किस परिस्थिति से गुजर रहा है,

_ लेकिन हम बिना सोचे-समझे ही दूसरे व्यक्ति के दर्द को जाने बिना ही उसके बारे में यह राय बनाना शुरू कर देता है कि फलां व्यक्ति ऐसा है या वैसा है.
_ न जाने ऐसे कितने लोगों की हमारे मन में छवि बुरी बनी हुई है, कि फलाना व्यक्ति ऐसा है वैसा है..!!
_ यदि किसी ने कुछ गलत किया हो आपके जीवन में, आपको दुख, कष्ट या हानि पहुंचाई हो तो उसे माफ कर दीजिए.
_ जीवन छोटा है, हमें लोगों को माफ़ कर देना चाहिए, चाहे उन्होंने हमारे साथ कितना भी गलत किया हो,
_ अपने भीतर किसी व्यक्ति के लिए कड़वाहट रखकर, इस जीवन को सहजता और शांति से नहीं जिया जा सकता, इसलिए माफ़ करें !!

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