हममें से बहोत लोग बहुत सारा कूड़ा अपने दिमाग में भरे हुए चलते हैं, जिन चीजों की जीवन में कोई ज़रूरत नहीं होती, उनको मेहनत करके जोड़ते रहते हैं, जैसे क्रोध, घृणा, चिंता, निराशा आदि ; जब उनके दिमाग में इनका कूड़ा बहुत अधिक हो जाता है, तो वे अपना बोझ हल्का करने के लिए इसे दूसरों पर फेंकने का मौका ढूँढ़ने लगते हैं,
इसलिए ऐसे लोगों से दूरी बनाए रखें और उन्हें दूर से ही मुस्कराकर अलविदा कह दें, क्योंकि अगर उन जैसे लोगों द्वारा गिराया हुआ कूड़ा हम स्वीकार कर लिए तो, हम भी कूड़ादान बन जायेंगे और अपने साथ साथ आसपास के लोगों पर भी कूड़ा गिराते रहेंगे.
कूड़ा सिर्फ कूड़े को ही नहीं कहते, बल्कि घर का वह सामान भी कूड़ा होता है जो सही ठिकाने नहीं रखा होता, इधर-उधर बिखरा रहता है, जिसके कारण घर एक बड़ा कूड़ेदान लगता है.
_ चीज़ें अपनी सही जगह पर रखी हों तो घर सँवरा हुआ अच्छा लगता है.
_ यह नहीं कि किसी मेहमान ने घर आना हो, तभी घर को सँवारें, अन्यथा क्या कूड़ेदान में रहते रहेंगे ?
– Manika Mohini






