पतझड़ में पेड़ से गिरने वाले पत्तों की तरह न बनें,
_ जिन्हें हवा द्वारा यहाँ से वहाँ दिशाहीन, लछ्यहीन उड़ा दिया जाता है.
हवा ने माफ़ी तो मांगी..
_ लेकिन तब तक सारे पत्ते गिर चुके थे.!!
_ जिन्हें हवा द्वारा यहाँ से वहाँ दिशाहीन, लछ्यहीन उड़ा दिया जाता है.