सुविचार 4682

पतझड़ में पेड़ से गिरने वाले पत्तों की तरह न बनें,

_ जिन्हें हवा द्वारा यहाँ से वहाँ दिशाहीन, लछ्यहीन उड़ा दिया जाता है.

हवा ने माफ़ी तो मांगी..

_ लेकिन तब तक सारे पत्ते गिर चुके थे.!!

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