अभी आपकी मुट्ठी में सिर्फ वर्तमान है _ इसे वाद- विवाद, तर्क- वितर्क, शंका- संदेह में बर्बाद न करें.
” आनंद के साथ सहज कर्म करते रहें ”
जीवन में हर जगह तर्क ना घुस जाये.
_ जीवन का सौन्दर्य बोध तर्क की सीमा से बाहर है.
_ जीवन का सौन्दर्य बोध तर्क की सीमा से बाहर है.





