वैसे तो खुशी को परिभाषित करना बहुत ही मुश्किल है लेकिन हमारी खुशी हमारी सोच पर निर्भर करती है. हम शिकायत कर सकते हैं कि गुलाब की झाड़ियों में कांटे होते हैं या खुश हो कर कह सकते है कि कांटों की झाड़ियों में गुलाब होते हैं. हमें हमेशा सुखद और कर वंदनीय लगने वाली सोच के साथ चलते रहना चाहिए.





