सुविचार 4883

जीवन में केवल दो ही वास्तविक धन है ; ” समय और सांसे ” और दोनों ही निश्चित और असीमित है, समझदारी से खर्च करें.

सुविचार 4880

जैसे ही आपका मन पूरी तरह से स्थिर हो जाता है,

आपकी बुद्धि मानवीय सीमाओं से परे चली जाती है.

सुविचार 4879

“जिस देह से श्रम नहीं होता, पसीना नहीं निकलता,

सौंदर्य उस देह को छोड़ देता है “

सुविचार 4878

” हम क्या मानकर चलें “

‘ हरेक को अपना दृष्टिकोण रखने का हक है ‘,

यह मानकर चलनेवाले लोग कभी अकेले नहीं चलते.

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