सुविचार 4883
जीवन में केवल दो ही वास्तविक धन है ; ” समय और सांसे ” और दोनों ही निश्चित और असीमित है, समझदारी से खर्च करें.
आपकी बुद्धि मानवीय सीमाओं से परे चली जाती है.
सौंदर्य उस देह को छोड़ देता है “
‘ हरेक को अपना दृष्टिकोण रखने का हक है ‘,
यह मानकर चलनेवाले लोग कभी अकेले नहीं चलते.