सुविचार 4105
समय आपका है, चाहें तो दूसरों की पंचायती में लगा लें
या ख़ुद के भविष्य बनाने में….मर्जी आपकी है..
या ख़ुद के भविष्य बनाने में….मर्जी आपकी है..
_उस बात को समझना बहुत मुश्किल होता है..
_ये वो गुनाह है जिसका हिसाब होना ही होना है और वो भी रब के द्वारा..
_ जिस प्रकार आग में तप कर सोना निखर कर कुन्दन बन जाता है, उसी तरह व्यक्ति कष्टों की आग में तप कर सोने जैसे व्यक्तित्व का स्वामी बन जाता है.
_ तराश रही है खुद ज़िंदगी निखर जाने के लिए.!!