सुविचार 4063

आत्म- सम्मान का मतलब यह है कि हम दूसरों के साथ ऐसा बरताव न करें,

_जो हम दूसरों से अपने लिए नहीं चाहते.

आपकी बेतुकी हरकतें.. _किसी भी सम्मान के लायक नहीं होतीं..
लोगों के साथ दोस्ती का व्यवहार करो, पर इतनी बेतकल्लुफी न करो कि अपना सम्मान ही खो जाए.!!
कुछ लोग आपके दिए गए सम्मान को गलत समझ लेते हैं.

_ उन्हें लगता है कि आज के जमाने में बिना मतलब के कोई इतना सम्मान क्यों देगा.

_ सम्मान का सम्मान करना भी हर किसी के बस की बात नहीं होती.
– – रिदम राही

सुविचार 4062

भोजन उपलब्ध होने और उसे ग्रहण कर पाने के लिए कृतज्ञ हो कर,

_ हम भोजन के समय को भी ध्यान के समान ही बना सकते हैं.

सुविचार 4061

जब कभी मनुष्य को दुख होता है, अपने ही भ्रम के कारण होता है. यदि मन में भ्रम न रहे तो उसे किसी का भय न रहे. – वृन्दावनलाल वर्मा.

सुविचार 4060

वही बात बोलनी चाहिए जिस से न स्वयं को कष्ट हो और न दूसरों को ही.

_ अतः सुभाषित वाणी ही श्रेष्ठ है.

सुविचार 4059

जब आपने सोच लिया है कि मुझे ये काम करना है, _तो फिर चाहे तो काम कितना ही कठिन क्यों न हो,

_एक बार उसे करने की कोशिश तो कीजिए.

कोशिश कोई भी छोटी नहीं होती, बस नियत साफ़ और ईमानदार होनी चाहिए.

सुविचार 4058

समझदार है वो जो काम को जल्द कर ले,

_ और काबिले तारीफ है वो जो कठिन काम को भी सादगी से कर दे.

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