सुविचार 3921

अपनी नजर हमेशा उस पर रखें, जो आप पाना चाहते हैँ, उस पर नहीं जिसे आप खो चुके हो !!

सुविचार 3920

“हर चीज़ का सृजन दो बार होता है,

_पहली बार दिमाग में और दूसरी बार वास्तविकता में “

जब तक आप वास्तविकता [ Reality ] से अपनी आँखें बंद रखेंगे,

_तब तक जीवन नरक बना रहेगा..!!

सुविचार 3919

खूबसूरत दिखने का मतलब सिर्फ यह नहीं है कि, आप किसी को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए ये सब करते हैं.

इस से आप का आत्मविश्वास भी बढ़ता है. साथ ही, इस से आप का मनोबल भी बढ़ता है.

सुविचार 3918

सपना एक देखोगे, मुश्किलें हजार आएंगी _ लेकिन

_ वो मंजर बड़ा खूबसूरत होगा, जब कामयाबी शोर मचाएगी.

जब आप नियमानुसार काम करने पर विश्वास करते हों तो फिर डर नहीं लगता,

_ आप में हर मुश्किल का सामना करने का आंतरिक साहस होता है..!!

हम जो काम कर रहे हैं, उसे करते हुए अपने आसपास की दुनिया को बेहद खूबसूरत बनाए रहो,

_इसमें मुश्किल तो है _लेकिन आपकी छोटी सी कामयाबी के बहुत बड़े मायने हैं..!!

यदि आप अपने सपनों का निर्माण नहीं करते हैं, तो कोई और आपको अपने सपनों का निर्माण करने के लिए किराए पर लेगा.

सुविचार 3917

ऊंचाई पर वो ही पहुँचते हैं जो, _ प्रतिशोध के बजाय परिवर्तन की सोच रखते हैं.

सुविचार 3916

तुलना के खेल में मत उलझो, क्योंकि इस खेल का कहीं कोई अंत नहीं..

_जहाँ तुलना की शुरुआत होती है, वहीं से आनंद और अपनापन खत्म होता है…

हर व्यक्ति में अलग क्रिया प्रतिक्रिया होती है,

_ किन्हीं व्यक्तियों का जीवन एक जैसा दिखने पर भी एक समान प्रतिक्रिया नहीं होती.

_ एक समान दिखता वैभव-ऐश्वर्य किसी को लिप्त करता है, किसी में संतुष्टि और ऊब भरता है.

_किसी से किसी की तुलना करनी व्यर्थ है.

बुद्धि द्वारा जीना – तुलनाओं, गणनाओं, योजनाओं, अवधारणाओं, विचारों द्वारा – यह सब गर्व की एक संरचना है जिसमें कोई सुंदरता या खुशी नहीं है – कोई जीवन नहीं है.

प्यार से जीना ही जीना है.

Living by intellect – by comparisons, calculations, schemes, concepts, ideas – is all a structure of pride in which there is not beauty or happiness – no life.

Living by love is living.

‘तुलना’ दुख का कारण है.’

_मैंने हज़ारों, लाखों की सैलरी पाने वाले उन लोगों को तब दुखी होते देखा है,
_जब उन्हें पता चलता है कि उनके साथी की सैलरी उनसे अधिक है.
_पहले जो अपनी सैलरी से खुश थे, दूसरे की अधिक सैलरी के बारे में सुन कर दुखी हो गए. क्यों ? “तुलना”
_मेरे से ज्यादा उसके पास कैसे ? “तुलना” यही है दुख.
— “तुलना मत कीजिए” किसी की अच्छाई से, किसी की सुंदरता से, किसी की तरक्की से..
_ खुशी ढूंढिए, अपने भीतर..
_जो मिला है, पर्याप्त है ..और चाहिए तो और पाने की कोशिश कीजिए..
_ मत रोकिए और पाने की चाहत को..
_लेकिन दूसरे को देख कर दुखी मत होइए..
– आपको जो भी मिला था, आप खुश हुए थे.
_तब आपने दूसरे के विषय में नहीं सोचा था.
_लेकिन जैसे ही दूसरे को भी कुछ मिला, वो खुश हुआ..
_अच्छी बात थी, लेकिन आप दुखी हो गए..
— “संसार दुखी है” अपने दुख से नहीं, दूसरे की खुशी से..
_संसार को खुश होना चाहिए था “अपनी खुशी से”
_ पर ये मन है,, ये स्वीकार नहीं करता किसी और को अधिक मिले.
_तुलना ही दुख है.
_ दुख जीवन का शाप है, खुशियों का ग्रहण है.
_दुख से मुक्त कीजिए खुद को..
_अपनी हथेली को देखिए..
_उनमें उकेरी गई आड़ी-तिरछी रेखाओं को देखिए, अपनी मुट्ठी को देखिए.
_क्या होगा, दूसरे की हथेली की रेखाओं को झांकने से.
_क्या होगा दूसरों की मुट्ठी खोल कर देखने से.
_ उसके पास कम हुआ तो आप खुश होंगे, हमदर्दी भी रखेंगे.
_ लेकिन अधिक हुआ फिर ?
_ फिर आपकी खुशी काफूर हो जाएगी.
_अपनी खुशी को संभालिए..
_ संतोष रखिए या न रखिए, “तुलना मत कीजिए”
_”तुलना दुख का कारण है”
_ अपनी खुशी मत फेंकिए.
error: Content is protected