सुविचार 4061
जब कभी मनुष्य को दुख होता है, अपने ही भ्रम के कारण होता है. यदि मन में भ्रम न रहे तो उसे किसी का भय न रहे. – वृन्दावनलाल वर्मा.
_ अतः सुभाषित वाणी ही श्रेष्ठ है.
_एक बार उसे करने की कोशिश तो कीजिए.
_ और काबिले तारीफ है वो जो कठिन काम को भी सादगी से कर दे.
_ वरना कुछ तो अपनी जिंदगी पैसो का दिखावा करने में ही बिता देते है.
_कि हम कितनी गहराई से जीते हैं.
_ ऐसे व्यक्ति की लोग इज्जत करना बंद कर देते हैं.