सुविचार 4061

जब कभी मनुष्य को दुख होता है, अपने ही भ्रम के कारण होता है. यदि मन में भ्रम न रहे तो उसे किसी का भय न रहे. – वृन्दावनलाल वर्मा.

सुविचार 4060

वही बात बोलनी चाहिए जिस से न स्वयं को कष्ट हो और न दूसरों को ही.

_ अतः सुभाषित वाणी ही श्रेष्ठ है.

सुविचार 4059

जब आपने सोच लिया है कि मुझे ये काम करना है, _तो फिर चाहे तो काम कितना ही कठिन क्यों न हो,

_एक बार उसे करने की कोशिश तो कीजिए.

कोशिश कोई भी छोटी नहीं होती, बस नियत साफ़ और ईमानदार होनी चाहिए.

सुविचार 4058

समझदार है वो जो काम को जल्द कर ले,

_ और काबिले तारीफ है वो जो कठिन काम को भी सादगी से कर दे.

सुविचार 4057

जो सादगी में रहते वो जीवन को गहराई तक समझ पाते है,

_ वरना कुछ तो अपनी जिंदगी पैसो का दिखावा करने में ही बिता देते है.

जीवन की लंबाई नहीं, गहराई महत्वपूर्ण है.

_कि हम कितनी गहराई से जीते हैं.

सुविचार 4056

जो बेवजह हर बात में अपनी सलाह देते रहते हैं,

_ ऐसे व्यक्ति की लोग इज्जत करना बंद कर देते हैं.

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