सुविचार 4043
*कुछ रिश्ते हैं,* *…इसलिये चुप हैं ।*
*कुछ चुप हैं,* *…इसलिये रिश्ते हैं ।।*
*कुछ चुप हैं,* *…इसलिये रिश्ते हैं ।।*
*ना जाने कितने सवालों की,* *आबरू तो रखती है…*
_ क्योंकि बिना गलती के भी बहुत कुछ सुना है मैंने..!!
*सावधान, तब तब कोई,* *पंख काटने जरूर आयेगा…*
*जो “प्रतिशोध” के बजाय* *”परिवर्तन” की सोच रखते है…!!!