सुविचार 3778
कोई ना पराया, कोई ना अपना ; हर खेल जरुरत का है…
कोई ना पराया, कोई ना अपना ; हर खेल जरुरत का है…
बाकी ज़िन्दगी बिलकुल हलकी फुलकी है..
वफादार और अच्छे लोग अक्सर सादगी में ही मिलते हैं.
मरने के बाद जाने कहां से इतनी ” अच्छाइयां ” ढूंढ कर लाते हैं.
Sometimes growth requires new company, new locations and new mindsets.
_ मगर विकास के लिए उसे निमित्त और चुनौती ज़रूर बनाया जा सकता है.
..हम अपने आप ही अच्छे लोगों से जुड़ जाते हैं..!!