सुविचार 3691
जैसे – जैसे हमारी चेतना का विस्तार होता जाता है,
_ जीवन के हर छेत्र में ह्रदय से स्वतः ही मार्गदर्शन आने लगता है.
जीवन की चेतना जीवन से अधिक है.
_ जीवन के हर छेत्र में ह्रदय से स्वतः ही मार्गदर्शन आने लगता है.
_ जिनको पूरा करने के लिए अपनों से ही छल करना पड़े.
_ बिना ख़ुशी के सफलता नहीं मिलती है.