सुविचार 3565

जीवन हमारे कर्मों पर आधरित है और ये ही हमारी सफलता व असफलता का आँकलन (कर्म ) करता है, हमारे सुख दुःख भी इसी में निहित हैं !

आखिकार जीवन न तो पीड़ा है और न ही आनंद, _ यह वैसा बन जाता है जैसा आप उसे बनाते हैं !!

सुविचार 3564

हर मनुष्य के शरीर में, उसके जैसे विचार होंगे, जैसी भावनाएं होंगी.

_ उसके शरीर से वैसी ही तरंगे भी निकलती हैं.

सुविचार 3563

माफ़ कर देने से बीता हुआ वक़्त नहीं बदलता, _ पर भविष्य जरुर बदल सकता है.

सुविचार 3562

अपनी अयोग्यता को छिपाने के लिए, उस से बड़ी योग्यता की आवश्यकता होती है.

सुविचार 3560

इन्सान जब सभ्य होता है तो उसके व्यवहार से मित्रता, प्रेम, सरलता, सहजता आदि गुण झलकतें हैं.

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