सुविचार 3385

आज जिस दौर में हम जी रहे हैं वहाँ _ सहानुभूति से ज्यादा “समानुभूति” की जरूरत है,

जैसे सुधार के लिए आलोचना से ज्यादा ‘समालोचना’ की जरूरत होती है !

सुविचार 3383

जब हम यह मानते हैं कि हम अपनी नियति का निर्माण करते हैं,_

_ तब हम अपने लछयों की प्राप्ति के लिए दिशा निर्धारित कर लेते हैं.

सुविचार 3382

हम इंसान हैं _ गलतियाँ तो इंसानों से ही होती हैं _ और बहुत बार सही होते हुए भी खुद को साबित करना पड़ता है,

_ लोगों को बस मौका चाहिए होता है जलील करने का, ऐसी है जिंदगी.

सुविचार 3381

आंखें सबकी एक सी, _ किंतु अलग है दृष्टि ।

एक स्वयं को देखती, _ एक देखती सृष्टि ।।

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