सुविचार 3430

कर्म एक ऐसा रेस्टॉरेंट है, जहाँ आर्डर देने की जरुरत नहीं है

हमें वही मिलता है जो हमने पकाया है.

सुविचार 3429

दिल की बात को ध्यान से सुनें और श्रद्धापूर्वक इसका अनुशरण करें,

इसे अपना आंतरिक मार्गदर्शक बन जाने दें.

सुविचार 3428

आपके आस पास कई लोग उथले नालों की तरह होते हैं,

जो थोड़ी सी सफलता पाते ही उफन पड़ते हैं और स्वयं का स्वरुप बिगाड़ बैठते हैं.

सुविचार 3426

समानुभूति यानी किसी और की भावनाओं को स्वाभाविक रूप से समझना,

कि वह क्या महसूस कर रहा है, उन्होंने आपमें क्या भाव जगाए हैं.

सुविचार 3425

“स्वीकार्यता” क्रमिक- विकास की सूचक है, हमारी तैयारी या मनोभाव यह होना चाहिए कि

चाहे जो भी हो, मैं उसका सामना करने के लिए तैयार हूँ.

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