सुविचार 3592
कभी किसी को उतनी ही तकलीफ देना, _ जितनी बाद में खुद बर्दाश्त कर सको.
कभी किसी को उतनी ही तकलीफ देना, _ जितनी बाद में खुद बर्दाश्त कर सको.
_ उन से उलझने के बजाय उनसे बचकर निकलना चाहिए.
उसकी रोशनी से यह आग्रह नहीं कर सकते कि वह केवल मेरे लिए ही प्रज्वलित हो.
_ और पूरा प्रयास ये है कि लोग आनंदित न दिखाई दे.
_ सब कुछ अपने आप ही बदल जाएगा.