सुविचार 3315
मुझे दुःख नहीं हो, मुझे सुख ही हो. _ इसी के लिए सारा जगत् प्रयास करता है.
मुझे दुःख नहीं हो, मुझे सुख ही हो. _ इसी के लिए सारा जगत् प्रयास करता है.
जानने वाले में ही कमी है _ सब कुछ सामने ही घटित हो रहा है.
लेकिन ज़्यादातर इंसान आगे बढ़ने की बजाय इस धक्के से गिर जाता है, और फ़िर गिर कर उठने में या तो बहुत देर लगाता है, या उठता ही नहीं…..
_ मगर पीछे धकेलने में कोई कसर नहीं छोड़ते..!!