सुविचार 4800

आजकल सब कुछ सेट होने के बावजूद भी लगभग हम सभी अपसेट से ही रहते हैं. हर समय दिमाग़ में चिन्ता ही चल रही होती है. इसलिए हम निराश और हताश ज्यादा होते हैं.

जो हमें सहज मे मिलता है वह दूध के समान होता है और जो माँगने से मिलता है वह पानी के समान. लेकिन जो कलह करके, मनमुटाव करके ज़बरदस्ती हासिल किया जाता है वह तो रक्त के समान होता है.
जो खो गया है हमें उसकी चिंता नहीं करनी चाहिए बल्कि जो है उसका भरपूर आनंद लेना चाहिए. यदि हमारे दो दांत टूट भी गए तो क्या हुआ? बाकी तीस तो हैं. हम उन दो की याद में शेष को दरकिनार क्यों करें ?

सुविचार 4799

यदि आप गुस्से के एक छण में धैर्य रखते हैं, तो आप दुःख के सौ दिन से बच सकते हैं.

सुविचार 4798

अगर रब ने आपसे वो ले लिया, जिसे खोने की आप कभी कल्पना भी नहीं कर सकते थे,

तो अवश्य वो कुछ ऐसा भी देंगे, जिसे पाने का आपने कभी सोचा भी नहीं होगा.

सुविचार 4797

असफलता के बाद हौंसला रखना आसान है..

पर सफलता के बाद नम्रता रखना उतना ही कठीन है..!

सुविचार 4796

व्यक्तियों का चयन हमारे जीवन को प्रभावित करे या न करे, लेकिन एक सही व्यक्ति की उपेक्षा हमें जीवन भर पश्चाताप करने के लिए मजबूर कर देती है.

सुविचार 4795

खुद पे थोड़ा घमंड होना जरुरी है, वरना लोग तुम्हें वहां भी दबाने की कोशिश करेंगे, जहां हुकूमत तुम्हारी होगी..
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