सुविचार 3055
हम जो हैं वही हम सोच पाते हैं ; _ हम अपने ढंग से सोचते हैं.
हम जो हैं वही हम सोच पाते हैं ; _ हम अपने ढंग से सोचते हैं.
*बल्कि* *महत्वपूर्ण यह है कि,* *”सोच” किस उम्र की रखते हो..!!!*
“रहम” जो इंसानियत की बुनियाद पर आज भी खड़ा है.
जबकि नाकामयाब व्यक्ति लोगों की बुराइयां करता है और सिर्फ उनसे जलता रहता है.
_ जबकि नाकामयाब व्यक्ति हमेशा अपने दिल में नफरत लिए घूमता है.
_ सबसे बड़ी सीख है सीखने की भूख को जिंदा रखना.!!