सुविचार 2957
दूसरे को अशांत कर के _ शांति पाने की आशा ही न करें !
दूसरे को अशांत कर के _ शांति पाने की आशा ही न करें !
जब तक हम दूसरों के दुख-सुख में हाथ नहीं बंटाएंगे तब तक जीवन की सार्थकता साबित नहीं होगी.
जब हम दया, सेवा और कर्तव्य-पारायणता से भरे होते हैं तो अपने आप में आनंद अनुभव करते हैं.
सभी के बीच अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए जीना ही जीवन है.
तथा दुखी के लिए प्रकृति का सर्वोत्तम उपहार है.
समय के साथ वह आशीर्वाद सिद्ध होती है…
Happiness is not about getting all you want. It is about enjoying all you have.
किधर चलना है, ये समझना़ बहुत जरूरी है,”