सुविचार 2869
नसीहत दीजिए मगर शर्मिंदा न कीजिए,
_ उद्देश्य दस्तक देना है दरवाजा तोडना नहीं.!!
_ उद्देश्य दस्तक देना है दरवाजा तोडना नहीं.!!
लेकिन वो भी सच है, जो देखा नहीं गया,
अर्द्ध सत्य कभी कभी झूँठ से ज्यादा खतरनाक होता है “
_ पीछे देखने के दर्पण से नहीं ..
जिंदगी में कुछ भी नहीं है.
आपके देखने पर, आपका एटीटयूड, आपकी पकड़, आपकी समझ, आपकी दृष्टि सब कुछ बनाती और बिगाड़ती है.