सुविचार 2834

जिसकी चेतना दूसरों पर है, जो सदैव यह देखता रहता है कि दूसरे मेरे बारे में क्या सोच रहे हैं, वह स्वयं से बहुत दूर है, वह स्वयं पर कभी लौट नहीं पाता, वह दूसरों को प्रभावित करने में ही लगा रहता है. उसका सारा जीवन अभिनय ही हो जाता है. ऐसा व्यक्ति कभी भी सत्य को उपलब्ध नहीं हो सकता, उसकी यात्रा जीवन के विपरीत है.

सुविचार 2833

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प्रसन्नताएं फूलों की तरह जब एक जगह इकट्ठी हो जाती है तो उन के ख़त्म होने में देर नहीं लगती.

सुविचार 2832

१. दर्पण – झूठ बोलने नहीं देगा.

२. ज्ञान – भयभीत होने नहीं देगा.

३. अध्यात्म – मोह करने नहीं देगा.

४. सत्य – कमजोर होने नहीं देगा.

५. प्रेम – ईर्ष्या करने नहीं देगा.

६. विश्वास – दुःखी होने नहीं देगा.

७. कर्म – असफल होने नहीं देगा.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

सुविचार 2831

जीवन में सुखी रहने के लिए दो शक्तियों का होना जरुरी है,

पहली सहन शक्ति और दूसरी समझ शक्ति !

सुविचार 2830

शब्द कितनी भी समझदारी से इस्तेमाल कीजिए,

फिर भी…………..सुनने वाला…..

अपनी योग्यता और मन के विचारों के अनुसार ही उसका मतलब समझता है..

सुविचार 2829

“हमेशा अपने विचारों, शब्दों और कर्म के पूर्ण सामंजस्य का लक्ष्य रखें. हमेशा अपने विचारों को शुद्ध करने का लक्ष्य रखें और सब कुछ ठीक हो जायेगा….”
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