सुविचार 2915
मुझे किसी की जरुरत नहीं ये घमंड है,
और सबको मेरी जरुरत है यह भ्र्म है.
और सबको मेरी जरुरत है यह भ्र्म है.
आप स्वयं में जैसे हैं एकदम सही हैं. खुद को स्वीकारिये.
कि वो खुद को भी छल लेता है, और खुद को पता भी नहीं लगने देता.
ढोलक बजाने वाले अपने जान- पहचान वाले ही होते हैं.
जीवन में कुछ बड़ा हासिल कर पाते हैं.