सुविचार 2880

भीतर क्या भरा पड़ा है, वही बाहर आएगा.

जिस सोच का संचय करेंगे, वही समय आने पर प्रकट होगा.

हम संचय उसी का करें जो प्रसन्नता बिखेरे.

सुविचार 2878

सुख तो चाहना, लेकिन दूसरे के दुख पर आपका सुख निर्भर न हो,

दूसरे के दुख पर आधारित सुख आपको अंततः दुख में ही ले जायेगा.

चाहना आसान है, चाहते रहना कठिन है..!!
लोग आप को नहीं चाहते, आपसे उन्हें जो मिल रहा है उसे चाहते हैं..!!

सुविचार 2877

दुसरों की खुशी में अपनी खुशी देखना एक बहुत बड़ा हुनर है,

जो इन्सान ये हुनर सीख जाता है वो कभी भी ? दुःखी नहीं हो सकता.

सुविचार 2876

उन व्यक्तियों के जीवन में आनंद और शांति कई गुणा बढ़ जाती है .!

जिन्होंने प्रशंसा और निंदा में एक जैसा रहना सीख लिया हो.!!

सुविचार 2875

जिसको यह जिंदगी मुसाफिर खाना दिखाई पड़ती है,

उसकी आँखें रब की तरफ उठती हैं.

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