सुविचार 2880
भीतर क्या भरा पड़ा है, वही बाहर आएगा.
जिस सोच का संचय करेंगे, वही समय आने पर प्रकट होगा.
हम संचय उसी का करें जो प्रसन्नता बिखेरे.
जिस सोच का संचय करेंगे, वही समय आने पर प्रकट होगा.
हम संचय उसी का करें जो प्रसन्नता बिखेरे.
जिसे हम बिना कुछ किये हरगिज़ नहीं पा सकते !!
दूसरे के दुख पर आधारित सुख आपको अंततः दुख में ही ले जायेगा.
जो इन्सान ये हुनर सीख जाता है वो कभी भी ? दुःखी नहीं हो सकता.
जिन्होंने प्रशंसा और निंदा में एक जैसा रहना सीख लिया हो.!!
उसकी आँखें रब की तरफ उठती हैं.