सुविचार 2966

इच्छाओं के अनुरूप जीने के लिए जुनून चाहिये,

वरना परिस्थितियां तो सदा विपरीत रहती हैं.

सुविचार 2965

समानुभूति याने कि वह तादात्म्य, जो स्वतः ही अन्य व्यक्ति के साथ स्थापित हो जाता है –

-उसकी भावनाओं को महसूस करें, वह जो कहना चाहे समझें.

सुविचार 2964

आस्था अस्तित्व की नींव है. बिना आस्था के हमारा अस्तित्व एक ऐसे नींव रहित भवन जैसा होगा,

जिसे हवा का हर झोंका या आँधी उड़ा ले जाए.

सुविचार 2963

आज का वर्तमान कहता है, किसी का भला करने से पहले दस बार सोच लो,

क्योंकि जिसका भला करने की सोचोगे, वह तुम्हारा बुरा करने की सोचेगा,

आज के समय में इंसान का ज्यादा अच्छा होना भी नुकसानदायक है,

लोग फ़ायदा उठाने लगते है, उसकी अच्छाई का.

सुविचार 2962

मन पर से अतीत की छापें हटा कर हम बदलने

और अपने भाग्य का निर्माण स्वयं करने का अवसर पा जाते हैं.

सुविचार 2961

जब कार्यों की अधिकता हो, तब करने के लिए उस कार्य को प्राथमिकता दें,

जिससे अधिक फल प्राप्त होता है.

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