सुविचार 2960
किसी से प्रशंसित होने मात्र से आप बड़े नहीं और किसी से निंदित होने मात्र से आप छोटे नहीं हो जाते,
सोचो, आपके कार्य महान है या अधम ?
सोचो, आपके कार्य महान है या अधम ?
वैसे ही बुराइयों से भरे मनुष्य में उस की थोड़ी सी अच्छाई उस के सारे अवगुणों को ढक देती है.
जबकि अच्छा स्वभाव उसे आजीवन निभा सकता है.
जब तक हम दूसरों के दुख-सुख में हाथ नहीं बंटाएंगे तब तक जीवन की सार्थकता साबित नहीं होगी.
जब हम दया, सेवा और कर्तव्य-पारायणता से भरे होते हैं तो अपने आप में आनंद अनुभव करते हैं.
सभी के बीच अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए जीना ही जीवन है.
तथा दुखी के लिए प्रकृति का सर्वोत्तम उपहार है.