सुविचार 2948
नहीं खायीं ठोकरें सफर में तो मंजिल की अहमियत कैसे जानोगे,
अगर नहीं टकराये गलत से तो सही को कैसे पहचानोगे.
अगर नहीं टकराये गलत से तो सही को कैसे पहचानोगे.
_ और अनुशासनहीन मन दुख की ओर ले जाता है.
बस एक व्यवहार और लगाव ही है, जो कभी बूढ़ा नहीं होता…..!!
पर अनचाही बात को, दिल से देवो निकाल.
तब सब लोग आपका सम्मान करते हैं.
ताकि आपके पास दूसरों की आलोचना करने का कोई समय न रहे.