सुविचार 2719
सारे ही काम ज़रूरी थे ज़िन्दगी में और होते भी गए…..
एक खुदा की इबादत ही थी जो, हर बार टलती गयी…
एक खुदा की इबादत ही थी जो, हर बार टलती गयी…
तो हमारा इंसान होना व्यर्थ है..
लेकिन उन समस्याओं से, मिलने वाली सीख को मत भूलिए.
क्योंकि सफलता का आकलन सदैव दूसरों के द्वारा होता है
जबकि संतुष्टि स्वयं के मन और मस्तिष्क द्वारा…
क्यूंकि उन्हें हर समाधान में भी समस्या नज़र आती है.
_ हमारी जिदंगी की सफ़लता का बड़ा हिस्सा होता है ..