सुविचार 2695
न किसी के धोखे में आओ और न किसी को धोखे में डालो.
लेकिन उनका लगातार बरसना ; बड़ी नदी का बहाव बन जाता है..
क्योंकि अनुमान हमारे मन की ‘कल्पना’ है, और अनुभव हमारे जीवन की ‘सीख’.
पर पहले की चोटें भी बेकार नहीं जाती.
_ समझदार वही है जो उस बात की तह तक खुद जाता है…
तो सारा विश्व शान्तिमय प्रतीत होता है.