सुविचार 2810
ये भी अजीब मनोविज्ञान है के तकलीफों की भी आदमी को लत लग जाती है,
और तकलीफ ना हो तो, घबराहट शुरू हो जाती है.
कुछ लोग तकलीफें बनी रहे, इसका नियमित आयोजन करते हैं.
कुछ तकलीफें हमारे साथ जुड़े लोगों कि _पहचान करवाने आती हैं !
और तकलीफ ना हो तो, घबराहट शुरू हो जाती है.
वो जीत दो कोड़ी की हो जाती है, जो इंसानियत हार के हासिल होती हो.
बाँकी सब ठीक है ठीक ही रहेगा.
और आप की फुल एनर्जी सफलता पाने में काम आएगी.
यह कार्य आप के अच्छे कर्म खुद करा लेंगे.