सुविचार 2699
असल में यह हमारा अहम है, जो हमें अपनी असफलता को ना स्वीकार करने के लिए विवश कर देता है.
_ बहुत-से लोग अपनी निजी ज़िंदगी, अपनी बीमारी और घरेलू समस्याओं को सबके सामने बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं और सोचते हैं, इससे लोगों की सहानुभूति उन्हें मिलेगी.
_ जबकि पीठ पीछे यही लोग उनकी इस आदत का मज़ाक बनाते हैं, क्योंकि ये समस्याएं तो सभी की हैं,
_लेकिन हर कोई इन्हें अटेंशन पाने का ज़रिया नहीं बनाता.
Stop judging people for the things you also do in private.
क्योंकि लंबे से लंबे रास्ते एक-एक कदम उठा कर पूरे हो जाते हैं.
लेकिन उनका लगातार बरसना ; बड़ी नदी का बहाव बन जाता है..