सुविचार 2692
संघर्ष जारी रहे …….. क्यों कि……पत्थर आखिरी चोट से टूटता है,
पर पहले की चोटें भी बेकार नहीं जाती.
पर पहले की चोटें भी बेकार नहीं जाती.
_ समझदार वही है जो उस बात की तह तक खुद जाता है…
तो सारा विश्व शान्तिमय प्रतीत होता है.
कभी- कभी गुच्छे की आखिरी चाबी ताला खोल देती है.