सुविचार 2580

अन्य प्राणी पेट के लिए जीते हैं, लेकिन मनुष्य *तृष्णा* में जीता है,

_ इसीलिए इसके पास सब कुछ होते हुए भी यह *सर्वाधिक* *दुखी* है.

_ आवश्यकता के बाद *इच्छा* को रोकें, अन्यथा यह अनियंत्रित बढ़ती ही जायेगी, और *दुख* का कारण बनेगी.

तृष्णा चतुर को भी अंधा बना देती है.

सुविचार 2579

एकता का किला सब से सुदृढ़ होता है. उस के भीतर रह कर कोई भी प्राणी असुरछा अनुभव नहीं करता.

सुविचार 2578

जितना असरदार एक अच्छा उदाहरण होता है,

उतनी असरदार डाँट- फटकार नहीं होती.

सुविचार 2577

कभी कभी अच्छे लोगों से भी गलतियां होती हैं, लेकिन इसका मतलब हरगिज़ नहीं है कि वो बुरे लोग हैं, बल्कि ये मतलब है के वो भी इंसान हैं.

सुविचार 2576

*’व्यक्ति ‘ क्या है..?* *ये महत्वपूर्ण नहीं है,*

*परन्तु* *’व्यक्ति में ‘ क्या है..?* *ये बहुत महत्वपूर्ण है…!*

सुविचार 2575

और अधिक पाने के चक्कर में सब कुछ होते हुए भी हम यूं ही ज़िंदगी परेशानी और अभाव में ही गुज़ार देते है, _

_फिर उनका उपयोग या दुरुपयोग कोई और ही करते हैं !

क्यों रुके हैं … तेरे कदम … तू फिर से चलने की कोशिश तो कर .!!

माना कि जो न मिल सका उसका अफसोस है .!!

मगर जो पास है उसमें जी भर के जीने की कोशिश तो कर .!!

रात को फूल को भी नही मालूम कि _

* उसे सुबह मंदिर पर जाना है* *या शव यात्रा पर जाना है,*

*इसलिये जिंदगी जितनी जीओ मस्ती से जीओ।।*

error: Content is protected