सुविचार 2544
*”मन” बड़ा चमत्कारी शब्द है,*
*इसके आगे “न” लगाने पर* *यह “नमन” हो जाता है*
*और* *पीछे “न” लगाने पर* *यह “मनन” हो जाता है*
*जीवन में “नमन” और “मनन” करते चलिए,*
*जीवन “सफल” ही नहीं* *”सार्थक” भी हो जायेगा
*इसके आगे “न” लगाने पर* *यह “नमन” हो जाता है*
*और* *पीछे “न” लगाने पर* *यह “मनन” हो जाता है*
*जीवन में “नमन” और “मनन” करते चलिए,*
*जीवन “सफल” ही नहीं* *”सार्थक” भी हो जायेगा
_ जबकि वो दूसरों की गलतियों से ही सब कुछ सीख जाता है ..
हजारों बातें दिल के अन्दर ही रह जाती हैं.
दो व्यक्तियों में से एक यदि झगड़ा न करे तो झगड़ा हो ही नहीं सकता,
झगड़ा करने के लिए दोनों का लड़ने को तैयार होना और दोनों की सहमती होना जरुरी है !!
यही आपकी उपस्थिति की सार्थकता है.